बेटियों को बचाने साइकिल पर महाराष्ट्र से बोकारो पहुंचे श्रीधर..

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चार बहनों की शादी में दहेज देने, बाद में कर्जा चुकाने की चिंता के बीच पिता की मौत। पढ़ाई छूट गई। पिता की मौत के बाद एक बहन के ससुराल से हमेशा दहेज की डिमांड। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के नागपुर निवासी श्रीधर आडे के जीवन की रीयल स्टोरी है। छोटी सी उम्र में इतना सब कुछ देखने के बाद उन्होंने बेटियों का महत्व जन-जन को बताने की ठानी और साइकिल लेकर निकल पड़े देश की यात्रा पर। बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ, दहेज-हटाओ का सन्देश लेकर साइकिल यात्रा शुरू की। उनकी जिद कुछ करने के जज्बे को देखते हुए उनकी हर राह आसान होती गई। उनकी मदद के लिए महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग मुंबई आगे आया। रास्ते में कई राज्यों के मीडिया कर्मियों, अधिकारियों का भी उन्हें भरपूर सहयोग मिला और आज अपनी यात्रा को लेकर आडे बोकारो जिला समाहरणालय पहुँचे।

जिला समाहरणालय में उपायुक्त के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री संदीप कुमार, जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी श्री शक्ति कुमार ने उनका स्वागत करते हुए आगे के भ्रमण के लिए शुभकामनाएं दी। नागपुर से करीब 250 किलोमीटर दूर भाम गांव के रहने वाले श्रीधर ने बताया कि उनकी चार बहनें थीं। वर्ष 1994 से लेकर 2006 के बीच उनकी शादी कराने में दहेज और विवाह के नाम पर लाखों रुपए का खर्च कर दिए। लोगों की उधारी ब्याज चुकाने के लिए उन्होंने सात एकड़ जमीन बेच दिया और फिर पुश्तैनी मकान। फिर भी कर्जा नहीं उतरा। इधर पिता की भी वर्ष 2011 में मौत हो गई। बड़ी बहिन के ससुरालवालों की ओर से लगातार दहेज की डिमांड जारी रही। इसी दौरान श्रीधर की पढ़ाई छूट गई। एक लड़की ने सुसाइड कर लिया। वे नागपुर गए और यहां पर दहेज के खिलाफ लड़ाई शुरू की और जिद की पूरे देश में लोगों को जागरूक करने की। बिना पैसे के कुछ नहीं होता, इसलिए मित्रों की मदद से साइकिल की व्यवस्था की।

श्रीधर आड़े ने कहा कि समाज में बेटियों का एक महत्वपूर्ण स्थान होता है। हमारे देश में दहेज प्रथा के चलन के कारण लोग बेटियों को या तो भ्रूण में ही हत्या कर देते है, या तो विवाह पश्चात उन्हें प्रताड़ित कर मार देते है। उनके अनुसार बेटी बचाओ अभियान को साकार करना एवं दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करना जरूरी है। इसके खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए ये पुरे देश में भ्रमण करने के लिए निकले है।

मौके पर उपस्थित उपायुक्त के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री संदीप कुमार ने कहा कि बेटियों के बिना समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अतः बेटियों को बचाने के लिए जन-जागरूकता जरूरी है। महाराष्ट्र से बेटियों को बचाने का संकल्प लेकर निकले श्री श्रीधर आड़े को उन्होंने समाज का दुत बताया।

 

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