औरैया हादसा: योगी सरकार के संवेदनहीन अफसरों ने घायलों व मृतकों को एक ही ट्रक में किया रवाना..

Bokaro, LockDown, write-up

जब यहां जिंदा मजदूरों की कोई सुध लेने वाला नहीं तो फिर लाशों की क्या औकात है| ये शब्द भले आपके कानों को चुभ सकते हैं लेकिन औऱेया हादसे में मारे गए प्रवासी मजदूरों के शव के साथ जैसा सलूक हुआ उसके बाद तो यहीं कहा जा सकता है| औरैया हादसे में जान गंवाने वाले बोकारो के 11 मृत प्रवासी मजदूरों के शव, व घायलों को आखिरकार बोकारो जिला प्रशासन के प्रयासों के बाद उनके गांव तक लाया जा सका|

दो दिन तक मृतक के परिजन डबडबाई आंखों से उनके शवों का इंतजार करते रहे| हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों में से एक राहुल सहीस मरने से पांच दिन पहले ही पिता बने थे| गांव में उनकी पत्नी ने 11 मई को उनके बेटे को जन्म दिया था| ये खबर सुनने के बाद राहुल 17 मई को अपने बच्चे की छठी में शामिल होने के लिए राजस्थान से पैदल ही निकल पड़े| तीन दिन तक पैदल यात्रा करने के बाद दिल्ली से इनलोगों ने डीसीएम गाड़ी में सफर शुरू किया लेकिन ये सफर उनकी जिंदगी का अंत लेकर आ गया| अपने आठ दिन के बच्चे को गोद में लेकर राहुल सहीस की पत्नी अपने पति को आखिरी बार देखने का इंतजार कर रही थी| ऐसे ही बाकी मृतकों के परिजन भी दो दिन से इंतजार में बैठे थे|

उधर इस दर्दनाक हादसे के बाद यूपी की योगी सरकार ने इतनी जहमत नहीं उठाई कि मृतकों व घायलों को व्यवस्थित तरीके से उनके गांव तक पहुंचा दे| उनके लिए किसी हवाई जहाज की उम्मीद नहीं की गई थी लेकिन कम से कम थोड़ी इज्जत के साथ उन प्रवासी मजदूरों के शवों को उनके परिजनों तक भेजने की कोशिश की जानी चाहिए थी| लेकिन योगी जी के सरकारी मुलाजिमों ने शवों को यूं ही ट्रक में काली प्लास्टिक की थैलियों में बर्फ की सिल्लियों से साथ बांधकर रवाना कर दिया| गर्मी के दिन में वो बर्फ की सिल्लियां पिघल कर पानी बनते जा रही थी| उन अधिकरियों ने मानवता को इस कदर ताक पर रख दिया कि उन्हें इंसानी जज्बातों की समझ भी नहीं रही| जिस ट्रक के एक कोने में 11 शव रखे थे उसी ट्रक के दूसरी छोर पर घायलों को बैठा दिया गया| गर्मी की वजह से शवों की हालत खराब होने लगी, उनसे बदबू आने लगी लेकिन वो घायल मजदूर लाचारी से उसी ट्रक में सफर करते रहे|

इस बात की शायद किसी को भनक नहीं लगती अगर ट्रक में सवार घायल विकास ने पिणड्राजोरा स्थित खीराबेड़ा गांव में अपने चाचा नागराज कालिंदी को फोन नहीं किया होता| जिसके बाद ये खबर मीडिया और इंटरनेट पर आ गई| जैसे ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को औरैया के अधिकारियों के इस संवेदनहीन कृत की जानकारी हुई तो फौरन उन्होंने ट्विट पर लिखा कि “यह स्थिति अमानवीय व संवेदनहीन है|” इसके साथ ही बोकारो उपायुक्त औऱ झारखंड पुलिस को टैग करते हुए आदेश दिया कि “झारखंड सीमा में प्रवेश करते ही घायलों का इलाज सुनिश्चित करें|साथ ही मृतकों के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके घर तक पहुंचाने का इंतजाम कर सूचित करें|”

अपने अगले ट्विट में मुख्यमंत्री सोरेन ने लिखा कि राज्य के प्रवासी मजदूरों के साथ हो रहे अमानवीय सलूक को रोका जा सकता था| साथ ही उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री य़ोगी आदित्यनाथ व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से शवों को उचित इंतजाम के साथ झारखंड बॉर्डर तक भेजने की अपील की| उन्होंने लिखा कि उसके बाद वो सम्मानजनक तरीके से उन मजदूरों के पार्थिव शरीर को उनके परिजनों तक पहुंचाएंगे|

आखिरकार सोमवार को बोकारो जिला प्रशासन द्वारा मृत 11 प्रवासी मजदूरों एवं घायलों को ससम्मान एंबुलेंस से लाने का कार्य किया गया। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार उपायुक्त ने तत्काल प्रभाव से सभी मृतकों तथा घायलों को लाने हेतु 12 एंबुलेंस गाड़ियों को झारखंड की सीमा बरही के लिए दंडाधिकारी नियुक्त के साथ भेज दिया था। जिसके बाद वहां से जिला के मृतकों व घायल मजदूरों को एंबुलेंस के माध्यम से बोकारो लाया गया। घायल मजदूरों को बेहतर उपचार हेतु सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं दर्दनाक सड़क हादसे में 11 मृत मजदूरों का उनके पैतृक निवास स्थान पर सम्मान के साथ जिला प्रशासन की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

इस सब के बाद औरैया के प्रशासनिक अधिकारी बेशर्मी के साथ ट्विट कर अपनी पीठ थपथपाने में लगे हैं| औरैया के डीएम अभिषेक सिंह ने ट्विट किया “माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के आदेशानुसार 6 मृतकों के शव कल रात्रि पुरुलिया, पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को व 11 मृतकों के शव आज सुबह बोकारो, झारखंड के अधिकारियों को स-सम्मान सुपुर्द किए गए।

ये मजदूर किसी शान-शौकत के लिए नहीं, बल्कि गांव में मिट्टी के घर में रहने वाले परिवार का पेट पालने के लिए दूसरे शहर जाकर मजदूरी करते थे|इनके ही तरह लाखों-लाख मजदूर अपना घर छोड़कर दूसरे शहरों में रात-दिन खटते हैं| इनके दम पर बड़े-बड़े शहरों में कई फैक्ट्रियां, निर्माण कार्य, आदि चलते हैं लेकिन आज जब इनके सर पर मुसबीत आई है तो हर कोई पीछे हट गया है| बड़े-बड़े दावे औऱ सरकारी घोषनाएं, सब खोखले साबित हो रहे हैं।

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