मकान मालिक को किराएदार ने बनाया बंधक, पड़ोसियों के हंगामे के बाद खुला राज..

Bokaro, Crime, News

कहते हैं डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होते हैं। किसी की जिंदगी की खोई उम्मीद की लौ आज के इस वैज्ञानिक युग में कोई फिर जलाता है तो वह डाक्टर ही है। लेकिन, स्वार्थी जमाने में बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो डॉक्टर को मिले भगवान के दर्जे को कलंकित करने से बाज नहीं आते। ऐसा ही चैंका देने वाला एक मामला सामने आया है इस्पातनगरी बोकारो में और कथित कुकृत्य के आरोपी बनाए जा रहे हैं एक नेत्ररोग विशेषज्ञ। शहर के जाने-माने और प्रतिष्ठित नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. डीके गुप्ता पर अमानवीय कृत्य का आरोप पड़ोस में रहने वाले लोगों ने लगाया है। अब तक हजारों-हजार लोगों की नेत्रज्योति प्रदान कर उन्हें दुनिया का दीदार कराने वाले डॉ. गुप्ता पर अपने ही मकान मालिक भाई-बहन की जिंदगी अंधेरी करने का आरोप लगा है।

मामला सिटी थाना इलाके के को-ऑपरेटिव कॉलोनी का है। दरअसल, सोमवार को कोआपरेटिव कॉलोनी में प्लॉट संख्या 229 स्थित मकान से मकान मालिक दीपक और उसकी बड़ी बहन मंजुश्री घोष को बेहद दयनीय हालत में बरामद किया गया। खबर जैसे ही मुहल्लेवासीयो को लगी आस पडोस के लोग जुट गये और जब सभी उस घर मे दाखिल हुए तो उस घर का दृष्य देखकर लोग दंग रह गये। दोनो भाई-बहन अधनग्न अवस्था मे दो अलग-अलग कमरे मे पड़े हुए थे। बहन को उपर वाले कमरे मे रखा गया था तो भाई को निचेवाले कमरे मे। दोनो के हाॅथ बॅधे हुए पाये गये। एैसा लग रहा था कि कई दिनो से दोनो को खाना नही दिया गया था। जिसके कारण पुरा शरीर सुखकर पतला हो गया था। घर के कमरे से बदबू आ रहा था। मौके पर पहुॅचे पुलिस ने दोनो को छुडाया और बोकारो जेनरल अस्पताल मे भर्ती कराया गया जहाॅ अभी दोनो का इलाज चल रहा है। दोनो को छुडाने मे पडोसीयो को काफी बल लगाना पडा और पिछले दो दिनो के मसक्कत के बाद दोनो को मुक्त कराया जा सका।

घटना के बारे में पड़ोसियों ने बताया की कॉपरेटीव के प्लॉट संख्या 229 में 56 वर्षीय मंजुश्री घोष और उनके 50 वर्षीय भाई दीपक घोष रहते हैं और ये मकान उनका है। दोनों के पिता 1981 में गुजर गए जिसके बाद से दोनों अकेले घर में रहते थे। दोनों ने प्लॉट को 2001 में किराए पर लगाया था। जिसमें मेडिकल की दुकान, आई स्पेशलिस्ट का क्लीनिक और ऑप्टिकल की दुकान चलता था। इस प्लॉट में दरअसल बोकारो के जाने माने आई स्पेशिलस्ट डॉ. डीके गुप्ता का क्लीनिक चलता है और इसके अलावा मंतोष कुमार नाम का एक और किराएदार रहता था। पिछले कई महीनों से जब पड़ोसियों ने मंजुश्री और दीपक को नहीं देखा तो उन्होंने किराएदारों से पूछा लेकिन सभी ने कहा कि दोनों ठीक है।

पड़ोसियों को फिर भी शक हुआ और काफी हंगामे के बाद उन्होंने जबरदस्ती घर में प्रवेश किया और तो अंदर का नजारा कुछ और था। दोनों को बंधक बनाकर रखा गया था। खाना-पीना नहीं देने के कारण दोनों काफी पतले हो गए थे। पड़ोसियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी और फिलहाल मामले को पुलिस ने अपने हाथों में ले लिया है।

को-ऑपरेटिव कॉलोनी के जिस प्लॉट संख्या 229 में भाई बहन दयनीय हालत में बरामद किए गए, वहां के पड़ोसी संतोष पांडेय ने कहा कि डॉक्टर गुप्ता ने जुल्म की पराकाष्ठा पार की है। उन्होंने जब दोनों भाई बहन की हालत के बारे में जानकारी लेनी चाही और मकान की चाबी मांगी तो उन्हें चाबी देने से साफ इनकार कर दिया गया। इसके बाद उन लोगों ने पुलिस को खबर दी। पुलिस ने अपने तरीके से ताला खुलवाकर दोनों भाई बहन को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।

Leave a Reply