दूसरे दिन भी बैंकों में बंद रहा ताला, सरकार के विरोध में नारेबाजी..

Bokaro, Business

बैंक कर्मचारियों की हड़ताल आज दूसरे दिन भी जारी रही। बैंकिंग कार्य पूरी तरह बाधित रहने से कारोबारी गतिविधियां भी प्रभावित रहीं और शादी विवाह के मौके पर बैंकों की बंदी होने से काफी समस्‍याओं का आम लोगों को सामना करना पड़ा और लोग आज दूसरे दिन भी परेशान होते रहे। इस हड़ताल से करोड़ों रुपए का लेनदेन प्रभावित हुआ है। 2 फरवरी को रविवार अवकाश की वजह से तीसरे दिन भी बैंक बंद रहेंगे। अब सीधे सोमवार को खुलेंगे बैंक।

इधर बैंक कर्मियों के हड़ताल का शनिवार को दूसरा दिन होने से सुबह से ही कर्मचारी अ‍पने बैंकों और परिसर में धरने पर बैठे। इस दौरान नारेबाजी संग कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। तदोपरांत अपनी-अपनी शाखाओं से निकल कर प्रदर्शन करते हुए जुलूस की शक्ल में बैंक ऑफ़ इंडिया बी.एस.सिटी शाखा सेक्टर-4 पर जमा हुए जहाँ एक विशाल सभा का आयोजन किया गया। विशाल सभा को संबोधित करते हुए आज के मुख्य वक्ता, फेडरेशन ऑफ़ बैंक ऑफ़ इंडिया स्टाॅफ यूनियन्स के महासचिव एवं झारखण्ड प्रदेश बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन के चेयरमैन श्री दिनेश झा ‘ललन’ ने अपनी बात प्रारंभ करते हुए सर्वप्रथम इस दो दिवसीय हड़ताल की सफलता के लिए जहाँ सभी अधिकारी एवं कर्मचारी, सदस्यों को बधाई दी, वहीं इस हड़ताल के कारण आम ग्राहकों को हुई कठिनाई के लिए खेद प्रकट किया एवं उन कारणों पर प्रकाश डाला जिसके कारण बैंक कर्मियों को बाध्य होकर हड़ताल पर जाना पड़ा।

उन्होंने कहा कि 2017 में हमसबों को आशा बंधी थी कि हमारा वेतन पुनरीक्षण समझौता जो कि 01 नवम्बर 2017 से लंबित है, समय पर हो जाएगा और यह आशा इसलिए बंधी थी कि भारत सरकार ने बैंकों की प्रतिनिधि संस्था इण्डियन बैंक एसोसिएशन (प्ठ।) को 2017 में ही निर्देश दिया था कि बैंक कर्मियों का वेतन पुनरीक्षण समझौता समय पर जल्द से जल्द करें। किन्तु आज 30 माह से उपर हो गया और अभी तक सम्मानजनक वेतन समझौता नहीं हो सका है। जबकि भारत सरकार बैंक कर्मियों के माध्यम से ही अपनी सारी विकास योजनाओं को क्रियान्वित करती रही है। यहाँ यह भी सोचने वाली बात है कि बैंक कर्मियों का कार्य पूर्णतया जोखिम भरा है। ऐसी स्थिति में जहाँ उनका वेतन अन्य सरकारी लोक उपक्रमों की तुलना में बेहतर होना चाहिए वहीं आज सबसे कम है। 1952 ई0 में ही शास्त्री एवार्ड में जस्टिस शास्त्री ने इस संबंध में भारत सरकार को सुझाव दिया था कि बैंकों में कार्य जोखिम को देखते हुए बैंक कर्मियों को बेहतर वेतनमान दिया जाना चाहिए। लेकिन सरकार ठीक इसके विपरीत कर रही है। आज भी इण्डियन बैंक एसोसिएशन (प्ठ।) हठधर्मिता पर बनी हुई है एवं बैंक कर्मियों की सभी प्रमुख मांगों यथा कम से कम 20 प्रतिशत वेतन वृद्धि, वेतन पर पेलोड 2 प्रतिशत से ज्यादा करने, विशेष भत्ता को मूलवेतन में जोड़ने, पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह करने आदि पर नकारात्मक रवैया अपनाये हुए है।

यह दो दिवसीय हड़ताल हमारे संघर्ष की शुरूआत है यदि इसके बाद भी हमारे 12 सूत्री मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार नहीं किया जाता है तो मार्च में 11, 12 एवं 13 मार्च त्रिदिवसीय हड़ताल तथा इसके उपरांत भी यदि कोई सकारात्मकता सामने नहीं आई तो 01 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की जा चुकी है। अभी तक हमने संघर्ष की बदौलत ही जो कुछ भी पाया है आगे भी संघर्ष ही हमारा एकमात्र विकल्प है एवं हम आशान्वित हैं कि हम पूर्व की तरह ही इस बार भी निश्चित सफल होंगे तथा अपनी अन्य मांगों यथा बैंकों की आर्थिक दुर्दशा के लिए जिम्मेवार एनपीए ;छच्।द्ध की वसूली के लिए कड़े कानून बनाने की मांग, ग्राहक सेवा में और सुधार के लिए सभी संवर्गों में समुचित बहाली की मांग आदि के लिए भी लम्बी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

सभा को सम्बोधित करने वालों में मुख्य रुप से एस0 एन0 दास, राजेश कुमार सिन्हा, राघव कुमार सिंह, मनोज कुमार, धनंजय कुमार, राजेश कुमार ओझा, राज कुमार, बिनोद कुमार सिन्हा, विभाष झा, सुबोध रजक, प्रदीप झा, अवधेश प्रसाद, राकेश मिश्रा, रामजी कुमार, श्रीमती प्रभा सिंह, श्रीमती पुष्पा रानी टूडू, मनमीत कौर, संजू कुमारी, आभा रानी, रणधीर मिश्रा, जयंत सिंह, एन के प्रसाद, कृष्ण मुरारी, अमर कुमार, गुंजन वर्मा, मानिक दास, संजीव शर्मा, आदि उपस्थित थे।

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