बाबूजी धीरे चलना, बड़ी मुश्किल हैं इन राहों में..

Bokaro, write-up

बोकारो : गड्ढे बोकारो की तकदीर बन गए हैं. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि शहर में जन प्रतिनीधि तो बड़े-बड़े वायदे करके आते हैं लेकिन यहां के सड़कों की तकदीर नहीं बदल रही.

शहर के नये मोड़ से माराफारी तक जाने वाले रास्ते में कई बड़े-बड़े गड्ढे हैं. झारखंड में अक्सर बारिश होती ही रहती हैं ऐसे में पानी बरस जाने से यहां पैदल चलना भी दुसवार हो जाता हैं. दूसरी तरफ से अगर कोई गाड़ी पार हो रही हो और आप इधर से पैदल जा रहे हो तो एक बार सोंचना पड़ेगा या फिर रूक ही जाना बेहतर होगा, क्योंकि गड्ढों में जमे पानी आपको कभी भी कीचड़ वाली होली खेलने पर मजबूर कर सकते हैं.

इस जानलेवे गड्ढे को लेकर न तो प्रशासन गंभीर हैं और न ही बीएसएल प्रबंधन. आपको बता दें कि आखिरी बार ये सड़क वर्ष 2014 में करीब 60 लाख की लागत से बनी थी.

बोकारो से माराफारी व जैनामोड़ सहित जियाडा जाने का यह मुख्य मार्ग है. इस्पात संयंत्र में काम करने वाले मजदूर हो या विद्यार्थी समेत अन्य राहगीरों का रातभर इस मार्ग से आना जाना लगा रहता हैं. रात में इन गड्ढों को पार करना किसी अप्रिय घटना को दावत देना भी साबित हो सकता है.

इसे लेकर लोगों में काफी आक्रोश है उनका कहना है कि इन जर्जर सड़कों के मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती रही हैं. मरम्मत के समय सही मैटेरियल नहीं डालने की वजह से सड़के ज्यादा दिन नहीं टिक पाती.

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