विस्थापितों ने की आत्मदाह की कोशिश, आश्वासन के बाद माने..

Bokaro, News

कनारी मौजा के विस्थापित रैयतों ने जमीन का मुआवजा देने की मांग को लेकर बुधवार को डीपीएलआर कार्यालय के समक्ष सामूहिक आत्मदाह करने का प्रयास किया। सुबह 10 बजे विस्थापित संगठन के सदस्यों का जुटान हवाई अड्डा के पास हुआ। विस्थापित हवाई अड्डा से रैली निकालकर नौकरी नहीं तो जमीन वापस करो की मांग करते हुए नारे लगाते भू-अर्जन कार्यालय पहुंचे। रैली में भारी संख्या में महिलाएं व पुरुष शामिल थे। लेकिन, विस्थापितों की रैली भू अर्जन कार्यालय पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें आत्मदाह करने से रोक दिया। जिसके बाद सभी कार्यालय के समक्ष धरना पर बैठ गए। विस्थापित बीएसएल में नियोजन नहीं तो जमीन वापस करने की मांग पर अड़े थे। रैली का नेतृत्व विस्थापित रैयत संघ के अध्यक्ष छोटू सिंह व मंच के जिलाध्यक्ष फूलचंद महतो ने किया।

विस्थापित रैयत संघ के छोटू सिंह का कहना था कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद रैयतों को मुआवजे की राशि का भुगतान भू-अर्जन कार्यालय की ओर से नहीं किया जा रहा है। वहीं नन टेक्निकल पद पर मैट्रिक पास विस्थापितों को नौकरी दी जाए। जिन परिवारों के एक भी सदस्यों को नौकरी नहीं मिली है, उनकी बहाली अविलंब की जाए। अगर बीएसएल नौकरी देने में सक्षम नहीं है तो जमीन वापस दिया जाए।

धरना के क्रम में जिला प्रशासन की ओर से एसडीओ चास, एक मजिस्ट्रेट व विस्थापित प्रतिनिधिमंडल के बीच वार्ता हुई। वार्ता में विस्थापितों को मुआवजा, नौकरी व पुनर्वास समेत जमीन वापसी पर चर्चा हुई। विस्थापितों के मुआवजा पर एसडीओ चास ने कहा कि विशेष भू अर्जन पदाधिकारी से सभी जानकारी जल्द प्राप्त करेंगे। नौकरी के संबंध में कहा गया कि जो नन तकनीकी पद एस-1 है, उसे बीएसएल प्रबंधन ने तकनीकी कर दिया है। इसके लिए ऑनलाइन बहाली निकलती है। विस्थापितों ने कहा कि उसे रोका जाए। केजुअल की बहाली जो अनियोजित परिवार के लिए थी, उसे सीधे बहाली चालू करने व बीएसएल की नौकरी देने में अक्षम होने पर रैयतों की जमीन वापस करने की मांग की।

वार्ता के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 15 फरवरी को खेलायचंडी मैदान में विस्थापितों का सम्मेलन होगा। जिसमें कई तरह के निर्णय लिए जाएंगे। उसके बाद आत्मदाह का निर्णय स्थगित कर दिया गया। मौके पर सुरजु कुमार महतो, फौदार सिंह, अर्जुन राम, सूरज सिंह, कृष्णा महतो, अशोक प्रमाणिक, राजू कुमार तुरी आदि मौजूद रहे।

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