बोकारो जिला प्रशासन प्रवासी मजदूरों के सुरक्षित वापसी के लिए लेकर आया मिशन सरल..

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कोरोना से बचाव के लिए हुए लॉकडाउन के बाद कई प्रवासी मजदूर व विद्यार्थी देश के अलग-अलग हिस्सों में फंस गए थे| अब सरकार द्वारा मंजूरी मिलने के बाद ये मजदूर और विद्यार्थी बोकारो अपने घर वापस आ रहे हैं| जिले भर के विभिनन् प्रखंडों को मिलाकर 20 हजार मजदूर और विद्यार्थियों के आने की बात कही जा रही है| लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी प्रवेश कर रही हैं जिसमें कोरोना संक्रमण का डर और मजदूरों के लिए रोजगार की समस्या शामिल है|

राहत भरी खबर ये है कि वर्तमान की इस चुनौती और भविष्य में आने वाली समस्याओं से निपटने के लिए बोकारो जिला प्रशासन ने एक बेहतरीन विकल्प तैयार किया है| उपायुक्त व उनकी टीम ने मिलकर मिशन सरल की शुरूआत की है| सरल यानि कि सेफ एराइवल एकोमोडेशन ऑफ लेबर, जिसमें वर्तमान औऱ भविष्य की स्थितियों से पार करने के उपाय सामने लाए गये हैं|

दरअसल मिशन सरल के तहत बाहर से आ रहे तमाम लोगों की मैपिंग की जा रही है| इसके अंतर्गत ये ध्यान रखा जा रहा है कि कौन किस राज्य से आया है, बोकारो में कहां जाएंगे, यात्रा के दौरान किन-किन लोगों के संपर्क में आए, कहां-कहां ठहरे, तथा जहां जा रहे वहां क्वारेंटाइन की क्या व्यवस्था है| इस तरह के कुल 20 प्वाइंट्स पर जानकारी ली जा रही है ताकि कोरोना संक्रमण अपने पांव न पसार पाए| बाहर से आ रहे लोगों से उनका नाम, पता, फोन नंबर व अन्य जरूरी जानकारी ली जा रही है| अगर किसी स्थिति में उनमें से कोई कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है तो उसके संपर्क में आए लोगों को चिह्नित करना आसान होगा| इस काम के लिए एआरसीजीआइएस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया है|

देश के नीति आयोग ने भी बोकारो प्रशासन के इस पहल की सराहना करते हुए ट्वीट किय़ा| ‘ढुंढ़ लेंगे किनारे’ कैप्शन के साथ नीति आयोग ने सरल डैसबोर्ड की फोटो के साथ बोकारो को #AspirationalDistrict यानि कि आकांक्षात्मक जिला करके संबेधित किया| साथ ही जानकारी दी कि बोकारो ने प्रवासी मजदूरों के सुरक्षित बोकारो वापसी के लिए मिशन सरल लॉन्च किया है|

आपको बता दें कि इस सरल सिस्टम को दो इंजीनियरिंग छात्र- चास निवासी एनआइटी सूरतकल के छात्र चित्रांश व बीआईटी गोवा के छात्र अभिषेक ने डिजाइन किया है| इनके साथ एडीएफ आदित्य मोहन व आदित्य अरूण ने भी अहम भूमिका निभाई है| इन्हें मिलाकर इस मिशन में 10 टेक्निकल समेत 50 कर्मियों व अधिकारियों ने सहयोग दिया है|

मिशन सरल को प्रभावशाली बनाने के लिए माइक्रो मैनेजमेंट के तहत काम किया जा रहा है| करीब 40 वॉलिंटियर इस मिशन के तहत काम कर रहे हैं| इसके लिए शुरूआती तौर पर एक कॉल सेंटर तैयार किया गया जिसमें जिला प्रशासन के कर्मियों ने बोकारो के करीब 38 हजार प्रवासियों से संपर्क किया| इनमें से 20 हजार लोगों का डाटा तैयार किया गया जिन्होंने बोकारो वापस आने की इच्छा जाहिर की| इसी तर्ज पर कितने लोग रेड, ऑरेंज औऱ ग्रीन ज़ोन से आ रहे हैं और बोकारो में कौन कहां जाएगा इसका प्रखंडवार सिलिसिले में डाटा तैयार हुआ| डाटा के मुताबिक सबसे ज्यादा, संभवत: करीब 6210 मजदूर गोमिया प्रखंड को लौटेंगे| बता दें कि अभी तक रेड जोन से 352, ऑरेंज से 256 व ग्रीन से 43 मजदूर बोकारो वापस आए हैं|

बाहर से आने वाले मजदूरों से हर छोटी-बड़ी जानकारी ली जा रही है| यात्रा के दौरान खाना मिला या नहीं और उन्होंने किस चेकपोस्ट से प्रवेश किया है, ये सारी जानकारी एकत्रित की जा रही है| इनमें से अगर किसी को स्वास्थ्य संबंधी कोई शिकायत होगी या अगर कोई कोरोना संक्रमित पाया गया तो किस सेंटर में ईलाज होगा, कौन-कौन से चिकित्सा कर्मी ईलाज करेंगे इस सब का डाटा तैयार किया गया है| होम क्वारेंटाइन के दौरान वीडियो कॉलिंग से मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है|इस कार्य के लिए अलग से टीम बनाई गई है| पूरे जिले को ज़ोन में बांट कर काम होगा|

जैसा कि हमने पहले बताया कि मिशन सरल वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में आने वाली समस्याओं के निदान का भी एक जरिया है| चूंकि लॉकडाउन के चलते इन मजदूरों के सामने रोजगार की समस्या उतपन्न हो गई है| इस समस्या का समाधान करने के लिए मैपिंग के दौरान मजदूरों से ये भी पूछा जा रहा है कि वो क्या करते थे तथा किस काम में वो निपुण है| इसके आधार पर स्कील, सेमी स्कील व नन स्कील की श्रेणी में डाटा तैयार किया जा रहा है| उपायुक्त ने बताया कि स्थानीय औद्योगिक ईकाइयों में बात चल रही है तथा जिले में मनरेगा के तहत अच्छा काम आ रहा है| ऐसे में इन मजदूरों को क्वारेंटाइन अवधि खत्म होने के बाद मनरेगा वर्कर के तौर पर रोजगार मुहैया कराया जा सकेगा| स्थानीय प्रतिष्ठानों में भी इनके नियोजन की व्यवस्था की जाएगी ताकि आगे चलकर पलायन रोका जा सके| इसके लिए भी प्रखंडवार डाटा तैयार किया जा चुका है|

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