सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही बोकारो स्टील प्लांट में 100 मजदूरों की मौत की झूठी खबर..

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सोशल मीडिया पर इन दिनों बोकारो इस्पात संयत्र में आग लगने की खबर वायरल हो रही है जिसमें 100 मजदूरों के मरने की भी बात कही जा रही है| लोग खबर के साथ-साथ आर.भारत न्यूज चैनल का एक वीडियो और एक जले हुए शवों को दर्शाती हुई तस्वीर शेयर कर रहे हैं| आपको बता दें कि वायरल हो रही इस खबर में मजदूरों की मौत पूरी तरह से झूठी है| ये तस्वीर असल में किसी बाहरी देश का है, बोकारो स्टील प्लांट का नहीं| वहीं आग का जो वीडियो है वो 22 सितंबर की रात टार डिस्टिलेशन यूनिट में लगी आग की है लेकिन इस घटना में किसी की भी जान नहीं गई थी|

बोकारो स्टील प्लांट में बीती रात लगी भीषण आग में करोड़ों का हुआ नुकसान..

लोग इस झूठी खबर को व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर पर शेयर कर अफवाह फैलाने का काम कर रहे हैं| जबकि बीएसएल ने पहले भी ये साफ कर दिया था कि इस आगजनी में ना मुख्य उत्पादन पर कोई असर पड़ा था ना ही किसी की जान गई थी|

वहीं अब वायरल हो रही इस झूठी खबर को देखते हुए बीएसएल ने निर्देश जारी करते हुए प्लांट के अंदर मोबाइल के उपयोग और फोटोग्राफी पर पूरी तरह से रोक लगा दी है| इसके तहत चेतावनी के लिए जगह-जगह बोर्ड लगाया गया है औऱ एक हफ्ते के लिए जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना है| बीएसल द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक इसके बाद जो लोग इस नियम का पालन नहीं करेंगे उनपर प्रबंधन कानूनी कार्रवाई करेगा|

दरअसल, किसी भी घटना के वक्त वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं जो कहीं ना कहीं वास्तविकता और तथ्यों से काफी अलग रहते हैं| ऐसा ही हुआ टार डिस्टिलेशन यूनिट में लगी आग की खबर को लेकर|किसी ने अपने मोबाइल पर आग की तस्वीरों को कैद कर उसे वायरल कर दिया| कई टीवी चैनलों ने भी इस आग के वायरल वीडियो को न्यूज में प्रसारित कर दिया| बस फिर देखते ही आग की ये खबर सोशल मीडिया वायरल होने लगी और कुछ लोगों ने तो कर्मचारियों के मौत का हवाला देते हुए झूठी तस्वीर तक फैला दी|

इस संदर्भ में संयंत्र के संचार प्रमुख मणिकांत धान ने बताया कि बोकारो इस्पात संयंत्र एक सार्वजनिक लोक उपक्रम है यहां बिना अनुमति के फोटोग्राफी पहले से ही वर्जित और दंडनीय अपराध में शामिल है| लेकिन इसके बावजूद कुछ कर्मचारी और यूनियन नेता संयंत्र के अंदर खींची हुई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं| श्री धान ने बताया कि इस संयंत्र में इस्पात के ऐसै भी उत्पाद बनाए जाते हैं जो कि सेना और रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल किये जाते हैं| इसलिए फोटो वायरल करना यहां की गोपनीयता भंग करना है|

 

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