बोकारो में अप्रैल से नहीं बिकेंगे बीएस 4 वाहन..

District Administration

पहली अप्रैल से बोकारो में सिर्फ बीएस 6 (भारत स्टेज) मानक के वाहन बिकेंगे। इसके साथ ही बीएस 4 मानक के वाहनों की बिक्री और निबंधन पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। सरकार का यह निर्णय वाहनों से बढ़ते प्रदूषण को कम करने में सहायक होगी।

शुक्रवार को जिला परिवहन पदाधिकारी श्री संतोष कुमार गर्ग की अध्यक्षता में समाहरणालय सभाकक्ष में वाहन विक्रेताओं के प्रतिनिधियों के साथ एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया। बैठक में जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि एक अप्रैल 2020 से केवल उन्हीं वाहनों की बिक्री और निबंधन होगा, जिनमें बीएस 6 मानक वाले इंजन का प्रयोग किया जाएगा। हालांकि 31 मार्च से पहले खरीदे गए बीएस 4 मानक के वाहनों के परिचालन पर रोक नहीं होगी।

31 मार्च 2020 के बाद बीएस-4 मानक वाहनों की बिक्री बंद-
आगामी 31 मार्च 2020 के बाद बीएस-4 (भारत स्टेज-4) मानक की वाहनों का निबंधन तथा बिक्री बंद होने के कारण उत्पन्न स्थिति की समीक्षा जिला परिवहन पदाधिकारी श्री संतोष कुमार गर्ग के द्वारा की गई।

20 मार्च 2020 तक सभी स्टॉक को क्लियर करें-
जिला परिवहन पदाधिकारी श्री संतोष कुमार गर्ग ने सभी वाहन विक्रेता प्रतिनिधियों को आगामी 20 मार्च 2020 तक सभी स्टॉक को क्लियर कर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया करने का निर्देश दिया।

ज्ञातव्य हो कि सभी वाहन ब्रिकेता प्रतिनिधियों को बीएस-4 वाहनों की स्टॉप उपलब्ध वाहनों की संख्या जिला जिला परिवहन कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। जिला परिवहन पदाधिकारी श्री संतोष कुमार गर्ग ने सभी वाहन विक्रेताओं के प्रतिनिधियों से कहा कि आज तक बिक्री किये गए सभी वाहनों को निबंधन कराएं। उन्होंने कहा कि निबंधन कराने वाले वाहनों को अस्थाई रूप से निबंधन कराने का निर्देश दिया। किसी भी स्थिति में बिना निबंधन वाहनों को वाहन स्वामी को हस्तगत नहीं कराने का निर्देश दिया गया।

अप्रैल 2017 से पूरे देश में लागू है बीएस 4 मानक-
भारत स्टेज यानी बीएस 4 मानक एक अप्रैल 2017 से पूरे देश में लागू हैं। यह एक ऐसा मानक है जिससे भारत में गाड़ियों के इंजन से होने वाले प्रदूषण को मापा जाता है। बीएस के आगे जितना बड़ा नंबर उस गाड़ी से उतने ही कम प्रदूषण संभव है।

बीएस-4 वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं खतरनाक है-
बीएस-4 वाहनों से कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे खतरनाक गैसें निकलती हैं। वहीं डीजल और डायरेक्ट इंजेक्शन पेट्रोल इंजन से पर्टिकुलेट मैटर यानि पीएम पैदा होता है। इसके ईंधन में सल्फर की मात्रा 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक होता है। जबकि बीएस-6 में यह 10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम होता है।

बीएस-6 वाहन फायदेमंद है-
बीएस-4 के मुकाबले बीएस-6 में नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा। डीजल इंजन में पर्टिकुलेट मैटर का स्तर भी 82 प्रतिशत कम रहेगा। बीएस-4 में पेट्रोल और डीजल इंजनों के लिए अलग-अलग मानक थे जबकि बीएस-6 में यह अंतर बहुत कम हो जाएगा।

बैठक के दौरान जिला परिवहन कार्यालय के बड़ा बाबू श्री अंबिका बाउरी, सड़क सुरक्षा के श्री गोविन्द सहित अन्य उपस्थित थे।

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