एक्सिलेंस, मेरिट व शत-प्रतिशत उपस्थिती के लिए बच्चों को मिला पुरस्कार..

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चिन्मय विद्यालय में वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया. सातवीं से ग्यारहवीं के छात्र-छात्राओं को एक्सिलेंस, मेरिट व शत-प्रतिशत उपस्थिती के लिए यह पुरस्कार दिया गया. कुल 347 छात्र-छात्राओं को 1000 पदक देकर पुरस्कृत किया गया। चिन्मय विद्यालय के अध्यक्ष विश्वरुप मुखोपाध्याय, विशिष्ट अतिथी आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंदा, सचिव महेश त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष आर एल मल्लीक, प्रभारी प्राचार्य अशोक कुमार झा ने मंत्रोच्चारण के साथ दीप प्रज्जवलीत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. वहीं कक्षा ग्यारहवीं के बच्चों ने भजन गाकर सभी आगंतुकों का स्वागत किया।

शिक्षा से जीवन महत्वपूर्ण तो बनता ही है, साथ ही साथ समाज व देश भी विश्व स्तर पर पहचाना जाता है। आज के जमाने में पुस्तक ज्ञान के साथ-साथ नैतिक शिक्षा व व्यवहारिक शिक्षा का ज्ञान भी बहुत जरुरी है। उक्त बातें चिन्मय मिशन की आचार्या स्वामिणी संयुक्तानंदा जी ने विद्यालय के तपोवन परिसर में कही।

आचार्या स्वामिणी ने आगे कहा कि गीता व रामायण के प्रसंगों को बच्चों के साथ बांटना चाहिए. जरुरत है, समय की मांग को पहचाने और अपने आप को आज के अनुसार तैयार कर ढ़ालें। उन्होंने कहा कि इन सभी बच्चों में अपार प्रतिभा एवं संभवनाएं हैं. जरुरत है इन्हें सही मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन की जो विद्यालय द्वारा समय-समय पर दी जाती है।

प्रभारी प्राचार्य अशोक कुमार झा ने अभिभावकों व बच्चों को संबोधित करते हुए कहा की बच्चे विद्यालय के लिए गहने के स्वरुप हैं। बच्चों के बेहतर कार्य पर उन्हें प्रोत्साहन करना हम सभी का परम कर्तव्य है। इससे बच्चों का मनोबल बढ़ता है साथ ही सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना आती है जिससे वे भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि वैश्वीकरण के इस युग में बच्चों का सही एवं समुचित विकास जरुरी है। भविष्य में आप देश-विदेश में बेहतर प्रदर्शन कर अपने विद्यालय का नाम रौशन करेंगें।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में संगीत विभाग के शिबेन चक्रवर्ती, जय किशन राठौर, पदमावती गरई, रेनु साह, रुपक झा व दिनेश कुमार एवं विद्यालय के अन्य शिक्षकों का अहम योगदान रहा। इसके अलावा सोनाली गुप्ता, सुब्रत गुप्ता ने भी मुख्य रूप से कार्यक्रम के संचालन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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