चिन्मय विद्यालय के बारहवीं के छात्र-छात्राओं को आर्शीवचन सह भावपूर्ण विदाई..

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चिन्मय विद्यालय के तपोवन सभागार में आज बारहवीं के छात्र-छात्राओं को ‘‘आर्शीवचन सह भावपूर्ण विदाई दी गई. कार्यक्रम की शुरुआत अध्यक्ष विश्वरूप मुखोपाध्याय, सचिव महेश त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष आर एन मलिक और प्रभारी प्राचार्य ए के झा ने दीप प्रज्जवलीत कर किया. मुख्य अतिथी मुखोपाध्याय ने अपने संबोधन में बच्चों से कहा की यह जीवन का ऐसा पल है जो सदैव स्मरणीय होता है. बच्चें जीवन में हमेशा लक्ष्य की साधना के लिए सही साधन एवं खुद पर भरोसा रखें.

उन्होंने कहा कि हमारे अन्दर शारीरिक मानसिक आध्यात्मिक विकास होना अति आवश्यक है. समाज से जो मिला हमेशा उसे वापस देने के लिए खुद को सशक्त बनाएं. साथ ही जिस क्षेत्र में जाएं माता-पिता, परिवार, समाज व देश के लिए अवश्य सोंचें. संयम, अनुशासन, आत्मज्ञान, स्वस्थ तन एवं मन ही बच्चों की सफलता की कुंजी हैं. अगर बच्चे परिश्रम करें तो सफलता उनके कदम चुमेगी. आगे उन्होंने बच्चों की तारीफ करते हुए कहा की वे कल के नवीन भारत के नायक हैं.

कार्यक्रम की शुरूआत ग्यारहवी के बच्चों ने गणेश वंदना नृत्य प्रस्तुत कर किया. फिर मधुर गीतों से कार्यक्रम में समा बांधा. जूनियर छात्र-छात्राओं ने सीनियर छात्रों के लिए कई संस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए. 12वीं कक्षा के मेधावी छात्र-छात्राओं को विषयवार, ऑल राउण्ड, संगीत, खेलकूद एवं अन्य क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए 322 बच्चों को पदक, प्रशस्त्री पत्र देकर सम्मानित किया गया.

बच्चों का स्वागत करते हुए प्रभारी प्राचार्य ए के झा ने कहा कि आप सभी में अद्वितीय प्रतिभा है. समय प्रबंधन का हमेशा उपयोग करें. जीवन में आगे बढ़ने के लिए आप सबसे पहले खुद से प्यार करें, जब आप खुद से प्यार करेंगें तब आप को स्वयं आपको अपनी मातृभूमी, अपने माता-पिता, अपने समाज से प्यार होगा. विद्यालय का जीवन एक इंसान के जीवन का सवार्धिक स्वर्णिम काल होता है. समाज के काम में आने योग्य बनें. अपने परिवार व घर से मिले संस्कार को देश के विभिन्न क्षेत्रों में साझा करें एवं सहयोग करें.

अंत में विधालय परंपरा को निभाते हुए बच्चों ने पुस्तकालय प्रागंण में दीप प्रज्जवलीत कर अपने गुरुजन का आशीष लिया. कार्यक्रम में सभी शिक्षकेतरगण तथा ग्यारहवीं के छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम योगदान दिया.

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