खत्म लेने का नाम नहीं ले रहा आवार कुत्तों का आतंक, प्रशासन / प्रबंधन नहीं उठा रहा कोई ठोस कदम..

Bokaro, write-up

शहर में अवारा कुत्तों के आतंक से लोग परेशान लेकिन हल दूर-दूर तक नहीं| लोगों की परेशानी का अंदाजा आप सदर अस्पताल के एंटी रेबीज इंजेक्शन लेने वालों लोगों की संख्या से लगा सकते हैं| सिर्फ सितंबर महीने में करीब 118 लोग अवारा कुत्तों के शिकार हुए| वहीं मई से लेकर 30 सितंबर तक करीब 617 लोगों को कुत्ते ने काटा|ये आंकड़े सिर्फ सदर अस्पताल चास के हैं| सदर अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक बोकारो समेत आसपास के प्रखंड से हर महीने 300 से अधिक लोग एंटी रेबीज का इंजेक्शन लेने आते हैं|

हमारी पिछली रिपोर्ट के मुताबिक सदर अस्पताल में 1 जुलाई से आज 18 सितंबर तक कुल 329 लोगों को रेबीज का इंजेक्शन लगाया गया था| वहीं बात करें महीनों की तो मई में 144, जून में 108, जुलाई में 138, अगस्त में 109, और सितंबर में 118 लोग कुत्ते का शिकार हुए| वहीं अगर लोगों को दिये गये डोज के आंकड़ें देखे तो एक महीने में तीन से अधिक डोज के अनुसार, मई में 359, जून में 284, जुलाई में 345, अगस्त में 285 और सितंबर में 298 एंटी रेबीज डोज दिये गये| ये सभी आंकड़े सदर अस्पताल के हैं| अस्पताल प्रबंधन बढ़ती संख्या से चिंतित है और उम्मीद कर रहा है कि जल्दी इसका कोई हल निकाला जाये|

इसका तात्पर्य ये है कि शहर में अब तक अवारा कुत्तों ने निपटने के कोई भी पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया| दूसरे शहरों की तर्ज पर यहां भी गलियों में घूमने वाले कुत्तों को रेबीज से बचाने के लिए इंजेक्शन लगाना चाहिए लेकिन इसके लिये ना तो यहां कोई टीम है ना कोई व्यवस्था| 28 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग की ओर से विश्व रेबीज प्रतिरोधक दिवस पर जागरूकता रैली निकालकर संपूर्ण टीकाकरण से रेबीज से बचाव का संदेश दिया गया| लेकिन ये एक संदेश मात्र रह गया और इस बात पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ कि आवारा कुत्तों का आतंक कैसे रोका जाये|

हालांकि कुछ लोग बताते हैं कि करीब 20 साल पहले बीएसएल प्रबंधन की ओऱ से आवारा कुत्तों को पकड़कर, दूर किसी जंगल या पहाड़ों में छोड़ दिया जाता था| लेकिन अब इस समस्या के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं| कुत्तों के खौफ से सुबह टहलने वाले लोग परेशान होते हैं, स्कूल जाने वाले बच्चे भी गली से निकलने में डरते हैं|

अभिभावक जल्दी अपने बच्चों के खेलने नहीं जाने देते|कुछ समय पूर्व ही कसमार में 5 साल की बच्ची को कुत्ते ने चेहरे पर काट लिया| समस्या ये है कि गर्दन के ऊपर अगर कुत्ते काट ले तो एंटी रेबीज इंजेक्शन काम नहीं करता| इसके लिए अलग से एक इंजेक्शन आता है जिसकी कीमत दो हजार से भी ज्यादा है|

प्रबंधन और प्रशासन को जल्द से जल्द आवारा कुत्तों के आतंक को खत्म करने के ओऱ कोई कदम उठाना चाहिए नहीं तो ये आंकड़ें कम होने की बजाए बढ़ते ही चली जाएंगे|

शहर में नहीं थम रहा आवारा कुत्तों का आतंक, रोजाना कई लोगों को बना रहे हैं शिकार..

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