पुरानी एजेंसी और डीवीसी की खींचातानी के बीच फंसे 250 प्रशिक्षणार्थी, नहीं हो रहा रजिस्ट्रेशन औऱ रिजल्ट..

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चंद्रपुरा स्थित डीवीसी प्राइवेट आईटीआई में करीब 250 प्रशिक्षुओं का भविष्य पिछले दो साल से अधर में लटका हुआ है| ये स्थिति नये टेंडर के तहत एजेंसी के आने पर हुई तकनीकी कारणों से हुई है| यहां कि पुरानी एजेंसी झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट ट्रस्ट डीवीसी को अपना आईडी पोर्टल और पासवर्ड उपलब्ध नहीं करा रही है| परिणामस्वरूप प्रशिक्षुओं का ना रजिस्ट्रेशन हो पा रहा है ना रिजल्ट मिल पा रहा है|

इस स्थिति के बाद यहां के प्रशिक्षणार्थियों में बेहद आक्रोश है तथा स्वभाविक रूप से भविष्य की चिंता उन्हें परेशान कर रही है| इनमें से कुछ शिक्षणार्थी चंद्रपुरा थाना में लिखित शिकायत करने भी गये लेकिन स्थानीय पुलिस ने उन्हें एसपी के पास भेज जहां आवेदन दिया गया|

दरअसल, डीवीसी ने झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट ट्रस्ट को ये आईटीआई संस्थान चलाने की जिम्मेदारी दी थी| साल 2013-14 में इसकी शुरूआत भी हुई लेकिन विभाग से एफिलेशन लेते वक्त उक्त एजेंसी ने अपने ट्रस्ट का नाम दे दिया| ऐसा होने से आईडी पोर्टल और पासवर्ड के उपयोग का अधिकार इस एजेंसी को मिल गया|

इम मामले पर जानकारी देते हुए डीवीसी आईटीआई के प्रभारी उप मुख्य अभियंता टीके डे ने कहा है कि पुरानी एजेंसी द्वारा आईडी और पासवर्ड नहीं देने कारण ये मामला फंसा है| एजेंसी से कई बार कहने के बावजूद अबतक आईडी-पासवर्ड उपलब्ध नहीं करवाया गया है| श्री डे ने कहा कि उक्त एजेंसी ने जिन प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया है उनका रजिस्ट्रेशन और रिजल्ट निकालने की जिम्मेदारी उसी की है| लेकिन दोबारा टेंडर ना मिलने के कारण एजेंसी नाराज है और ऐसा कर रही है| श्री डे ने बताया कि मामले को लेकर संबंधित विभाग से बातचीत चल रही है ताकि जल्द समाधान निकले|

वहीं पुरानी एजेंसी झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट ट्रस्ट के निदेशक मो. रफीक का कहना है कि डीवीसी से एक साल का विस्तार मांगा गया था ताकि मामला तकनीकी रूप से ना फंसे और एफिलेशन डीवीसी के नाम हो जाए| लेकिन ऐसा हुआ नहीं और इस संदर्भ में डीवीसी कोलकाता मुख्यालय को लिखा जा चुका है| मो. रफीक ने कहा कि अब उनकी एजेंसी का आईडी-पासवर्ड मांगा जा रहा है जो नहीं दिया जा सकता| उन्होंने कहा कि इस साल डीवीसी ने नये प्रशिक्षणार्थियों का दाखिला बिना ट्रस्ट को विश्वास में रखे लिया है|

आपको बता दें कि उक्त एजेंसी ने लगातार 6 साल तक प्रति दो वर्ष पर 72 लाख की दर से काम किया| इस साल ओपन टेंडर निकाला गया जिसमें संस्थान चलाने की जिम्मेदारी रांची की किसी दूसरी एजेंसी को दे दिया गया| ये नई एजेंसी प्रति दो वर्ष 39 लाख रूपये की दर से काम कर रही है| 1 अक्टूबर से नई एजेंसी ने जिम्मा तो संभाल लिया लेकिन आईडी पासवर्ड की सुविधा ना मिलने के कारण पिछले साल के प्रशिक्षणार्थियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है वहीं जिन प्रशिक्षणार्थियों ने परीक्षा दे दिया है उनके परिणाम निकल नहीं पा रहे है|

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