भाजपा जिलाध्यक्ष ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किये गए बदलाव को बताया सतत विकास के अनुकूल..

Bokaro

केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किये गए बदलाव को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष भरत यादव ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस किया| इस दौरान अपने संबोधन में श्री भरत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की केंद्र सरकार ने शिक्षा को सर्व-समावेशी और प्रासंगिक बनाने के लिए आधारशिला रखी है| ये 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है जो 34 साल पुरानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनपीई) 1986 की जगह लेगी| इक्विटी, गुणवत्ता, वहनीयता और जवाबदेही के आधारभूत स्तंभों पर निर्मित ये नई शिक्षा नीति सतत विकास के लिए एजेंडा 2030 के अनुकूल है| इसका उद्देश्य 21वीं सदी की जरूरतों के अनुकूल स्कूल और कॉलेज की शिक्षा को अधिक समग्र व लचीला बनाते हुए भारत को ज्ञान आधारित जीवंत समाज और ज्ञान की वैश्विक महाशक्ति में बदलने और प्रत्येक छात्र में निहित क्षमताओं को सामने लाना है|

नई शिक्षा नीति की प्रमुख बिंदुओं पर रोशनी डालते हुए श्री भरत ने बताया कि इसमें भाषा के विकल्प को बढ़ा दिया गया है| सरकार की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि छात्र 2 से 8 साल की उम्र में जल्दी भाषाएं सीख जाते हैं| इसलिए उन्हें शुरुआत से ही स्थानीय भाषा के साथ तीन अलग-अलग भाषाओं में शिक्षा देने का प्रावधान रखा गया है|नई शिक्षा नीति में छात्रों को कक्षा छह से आठवीं के बीच कम से कम दो साल का लैंग्वेज कोर्स करना भी प्रस्तावित है|

नई एजुकेशन पॉलिसी में केंद्र सरकार द्वारा नया पाठ्यक्रम तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया है| नया प्रस्ताव 5 +3+3+4 का डिजाइन तय किया गया है|ये 3 से 18 साल के छात्रों यानि कि नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए डिजाइन किया गया है|इसके तहत छात्रों की शुरुआती स्टेज की पढ़ाई के लिए 5 साल का प्रोग्राम तय किया गया है|इनमें 3 साल प्री.प्राइमरी और कक्षा 1 और 2 को जोड़ा गया है| इसके बाद कक्षा 3, 4 और 5 को अगले स्टेज में रखा गया है| इसके अलावा क्लास 6, 7, व 8 को तीन साल के प्रोग्राम में बांटा गया है|आखिरी 4 वाले में हाई स्टेज में कक्षा 9,10, 11, व 12 को रखा गया है|

पुरानी व्यवस्था में 4 साल इंजीनियरिंग पढ़ने के बाद या 6 सेमेस्टर पढ़ने के बाद अगर कोई छात्र आगे नहीं पढ़ सकता है तो उसके पास कोई उपाय नहीं है|छात्र आउट ऑफ द सिस्टम हो जाता है| लेकिन नई व्यवस्था में इसमें भी थोड़ा बदलाव किया गयाहै| नए सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा, तीन या चार साल के बाद डिग्री मिल सकेगी|

मल्टीपल एंट्री थ्रू बैंक ऑफ क्रेडिट के तहत छात्र के फर्स्ट व सेकेंड ईयर के क्रेडिट, डिजीलॉकर के माध्यम से क्रेडिट रहेंगे| जिससे कि अगर छात्र को किसी कारण ब्रेक लेना है और एक फिक्स्ड टाइम के अंतर्गत वह वापस आता है तो उसे फर्स्ट और सेकंड ईयर रिपीट करने को नहीं कहा जाएगा| छात्र का क्रेडिट, एकेडमिक क्रेडिट बैंक में मौजूद रहेगा, यानि की स्पष्ट है कि छात्र अपनी आगे की पढ़ाई में भी उसका इस्तेमाल कर सकेंगे|

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत एमफिल पाठ्यक्रमों को बंद किया जाएगा|केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा बुधवार को पारित नई शिक्षा नीति के अनुसार बोर्ड परीक्षाएं जानकारी के अनुप्रयोग पर आधारित होंगी| नई शिक्षा नीति में स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक कई बड़े बदलाव किए गए है|हायर एजुकेशन के लिए सिंगल रेगुलेटर रहेगा|लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फीसदी जीईआर पहुंचने का लक्ष्य है|

प्रेस वार्ता में बोकारो विधायक बिरंची नारायण, शशिभूषण ओझा मुकुल, सुनील गोस्वामी, कमलेश राय, दिलीप श्रीवास्तव, संजय त्यागी, इंद्र कुमार झा, धीरज झा, सुजीत चक्रवर्ती, पन्ना लाल कान्दू, अजय सिंह, श्यामलोचन सिंह, द्वारिका सिंह मुन्ना, सनातन सिंह, व महेंद्र राय उपस्थित थे|

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