टेक क्रिएशन चैंपियन बने बोकारो के शुभम झा, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने किया सम्मानित..

Pride Bokaro

अपने तेज दिमाग औऱ अद्भूत तकनीकी समझ के दम पर एमजीएम स्कूल के 12वीं के छात्र शुभम झा ने बोकारो का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है| राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिविजन, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं इंटेल इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ‘आईडीएट फॉर इंडिया प्रतियोगिता’ में टॉप 50 छात्रों में शामिल शुभम झा को टेक क्रिएशन चैंपियंस के नाम से सम्मानित किया गया | इस उपलब्धि के लिए शुभम को इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद द्वारा 17 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सम्मानित किया| इस दौरान चयनित 50 छात्रों के प्रोजेक्ट का मूलरूप शोकेस भी किया गया|

इस प्रतियोगिता का आयोजन तीन फेज में हुआ था जिसमें पहले फेज में बच्चों को अपने सुझाव को लेकर 90 सेकेंड का वीडियो भेजना था| देशभर से करीब 1 लाख 33 हजार छात्रों की एंट्री हुई थी जिसमें हर राज्य से बेस्ट 8-10 छात्रों का चुनाव करते हुए कुल 360 छात्रों का फेज 2 के लिए चयन किया गया| इन छात्रों को 5 अलग-अलग ज़ोन में आयोजिक बूट कैंप्स में भेजा गया जहां छात्रों को उनके प्रोजेक्ट से संबंधित पूरी मदद दी गई| यहां उनके सुझावों को मूलरूप देने के लिए विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया| अंत में टॉप 50 छात्रों का चयन हुए जिन्हें टेक क्रिएशन चैंपियंस के नाम से सम्मानित किया गया| इनमें से एक बोकारो के शुभम झा भी थे|

शुभम झा ने एक ऐसा उल्लेखनीय डिवाइस बनाया जिससे कोई नेत्रहीन दिव्यांग बिना किसी सहारे के आराम से चलते हुए रास्ते में आने वाले किसी रूकवाट को भांप सकता है और इससे वो पहले ही सावधान हो जाएगा| नेत्रविहीन व्यक्ति इस डिवाइस को पहन सकता है और फिर उसे किसी भी सहारे जैसे की छ़ड़ी या इंसान के मदद की जरूरत नहीं पड़ेगी| दरअसल ये डिवाइस आस-पास के वातावरण को स्कैन कर लेता है और किसी भी तरह के अवरोधों जैसे कि गढ्ढ़े, सीढ़ी, आधा खुला या बंद दरवाजे वगैरह की पहचान कर सावधानी से चलने में मदद करता है| जैसे ही सामने किसी तरह का अवरोध होता है ये डिवाइस सेंसर के जरिए उसकी पहचान कर लेता है और हैप्टिक फीडबैक तकनीक के जरिए विभिन्न तरह के वाइब्रेशन उतपन्न करता है| इससे उस नेत्रहीन व्यक्ति को अवरोधों का अंदाजा हो जाएगा|

बोकारो अपडेट्स से हुई बातचीत में शुभम ने बताया कि वो क्लास 10 से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे| इस डिवाइस को बनाने की प्रेरणा उन्हें आशालता दिव्यांग केंद्र में मिली| वहां उन्होंने देखा कि नेत्रहीन लोग छड़ी या किसी इंसान के सहारे चलना-फिरना कर रहे थे| ऐसे में उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की सोच लेकर शुभम ने डिवाइस के ऊपर काम करना शुरू किया| दिन-रात मेहनत कर उन्होंने इस डिवाइस को संभव कर दिखाया|

शुभम के पिता श्री राकेश कुमार झा बोकारो में अपना बिजनेस करते हैं औऱ माता श्रीमती अर्चना झा गृहणी हैं|शुभम कहते हैं कि उनका तकनीक के तरफ खासा झुकाव है और वो आगे कंम्प्यूटर साइंस की पढ़ाई कर तकनीकी क्षेत्र में नाम कमाना चाहते हैं| उन्होंने बताया कि इस कार्य को लिए उन्हें अपने शिक्षकों औऱ दोस्तों का भरपूर सहयोग मिला है|

आपको बता दें कि राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिविजन, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं इंटेल इंडिया ने मिलकर वर्ष 2018 के अंत में ‘आईडीएट फॉर इंडिया’ नामक एक चैलेंज की शुरूआत की थी| इसका उद्देश्य देश के युवा छात्रों को उनके और उनके आसपास देखे जाने वाली समस्याओं के लिए ‘समाधान निर्माता’ बनने का एक मंच और अवसर प्रदान करना है। इसके तहत स्थानीय महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना औऱ उसका स्वदेशी समाधान विकसित करके उन्हें भविष्य के प्रौद्योगिकी निर्माता और नवप्रवर्तक बनने के लिए प्रेरित करना है|

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